
भारत में टैक्सी सेवाएँ लगातार बदल रही हैं। मौजूदा दौर में ओला, उबर जैसी कंपनियाँ बाजार पर हावी हैं, लेकिन अब एक बड़ी सहकारी टैक्सी सेवा (Taxi Service) शुरू होने जा रही है। यह सेवा “सहकार से समृद्धि” के सिद्धांत पर आधारित होगी और इसे इच्छुक टैक्सी चालकों द्वारा स्वयं प्रबंधित किया जाएगा।
सहकारी टैक्सी सेवा (Taxi Service) की अनूठी पहल
लोकसभा में त्रिभुवन सहकारी यूनिवर्सिटी विधेयक, 2025 पर चर्चा के दौरान केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने घोषणा की कि कुछ महीनों में एक बहुत बड़ी सहकारी टैक्सी सेवा (Taxi Service) शुरू की जाएगी। इस सेवा में दोपहिया, रिक्शा, टैक्सी और चौपहिया वाहन शामिल होंगे, और सबसे महत्वपूर्ण बात यह होगी कि लाभ सीधे चालकों को मिलेगा।
इस नई प्रणाली के तहत, चालक स्वयं सेवा के मालिक होंगे, और लाभ का उचित वितरण होगा। इससे उन्हें बेहतर आर्थिक अवसर मिलेंगे और वे अधिक आत्मनिर्भर बन सकेंगे।
सहकारी मॉडल की कार्यप्रणाली
- सहकारी समिति का गठन: इच्छुक टैक्सी चालक मिलकर एक सहकारी समिति बनाएंगे।
- लोकतांत्रिक प्रबंधन: प्रत्येक सदस्य को समिति में समान अधिकार मिलेगा।
- मुनाफे का वितरण: अर्जित लाभ को सदस्यों के बीच समान रूप से वितरित किया जाएगा।
- डिजिटल तकनीक का उपयोग: यह सेवा एक ऐप-आधारित प्रणाली पर काम करेगी, जिससे पारदर्शिता बनी रहेगी।
सहकारी टैक्सी सेवा (Taxi Service) के संभावित लाभ
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ड्राइवरों के लिए अधिक लाभ
- वर्तमान टैक्सी एग्रीगेटर्स (ओला, उबर) उच्च कमीशन लेते हैं, जिससे चालकों को कम कमाई होती है।
- सहकारी सेवा में कोई बड़ा कमीशन नहीं होगा, जिससे चालक अधिक कमा सकेंगे।
- सीधा लाभ चालकों को मिलेगा, जिससे उनकी आय और जीवन स्तर में सुधार होगा।
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उपभोक्ताओं के लिए किफायती सेवा
- बिचौलियों की भूमिका कम होने से किराए में कमी आएगी।
- पारदर्शी मूल्य निर्धारण से ग्राहकों को अधिक विश्वसनीय और सस्ती टैक्सी सेवाएँ मिलेंगी।
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स्थिरता और सुरक्षा में सुधार
- सहकारी संगठनों में स्थानीय जवाबदेही अधिक होती है, जिससे सेवा की गुणवत्ता सुधरती है।
- चालकों को बेहतर प्रशिक्षण, बीमा और स्वास्थ्य सुविधाएँ मिलेंगी।
- यात्रियों और चालकों दोनों के लिए सुरक्षित सफर सुनिश्चित किया जाएगा।
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छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में विस्तार
- मौजूदा टैक्सी सेवाएँ मुख्य रूप से शहरों तक सीमित हैं।
- सहकारी मॉडल छोटे शहरों और गाँवों में भी अपनी सेवाएँ पहुँचा सकता है।
- ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा और अधिक लोगों को रोजगार के अवसर मिलेंगे।
टैक्सी सेवा (Taxi Service) : संभावित चुनौतियाँ और उनके समाधान
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प्रारंभिक पूंजी और संरचना की जरूरत
- शुरुआत में निवेश की आवश्यकता होगी, जिससे तकनीकी प्लेटफॉर्म और बेड़े का विकास किया जा सके।
- सरकारी अनुदान और लोन योजनाएँ इस कमी को पूरा कर सकती हैं।
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तकनीकी अवसंरचना की आवश्यकता
- सहकारी सेवा को ऐप-आधारित प्रणाली की जरूरत होगी, जिससे बुकिंग आसान हो सके।
- वर्तमान में उबर और ओला जैसे प्लेटफॉर्म AI और GPS तकनीक का उपयोग करते हैं, जो सहकारी मॉडल के लिए भी आवश्यक होगा।
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सरकारी नीतिगत सहयोग
- सरकार को सहकारी टैक्सी सेवा को कर छूट, लोन और सब्सिडी के रूप में समर्थन देना होगा।
- इस सेवा को मुख्यधारा में लाने के लिए प्रचार और जागरूकता अभियान चलाने होंगे।
भारत में सहकारी टैक्सी सेवा (Taxi Service) का भविष्य
भारत में पहले से 8 लाख से अधिक सहकारी संस्थाएँ कार्यरत हैं, जो 30 करोड़ से अधिक लोगों को सेवाएँ प्रदान कर रही हैं। इनमें डेयरी, बैंकिंग, कृषि और अन्य क्षेत्रों में सहकारी मॉडल ने सफलता हासिल की है।
अमूल इसका सबसे अच्छा उदाहरण है, जिसने लाखों किसानों को सीधा लाभ पहुँचाया। इसी प्रकार, सहकारी टैक्सी सेवा भी एक सफल मॉडल बन सकती है।
सहकारी टैक्सी सेवा (Taxi Service) सिर्फ एक नई पहल नहीं है, बल्कि यह टैक्सी उद्योग में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है। यह मॉडल न केवल चालकों के लिए फायदेमंद होगा, बल्कि उपभोक्ताओं को भी सस्ती और बेहतर सेवा देगा। यदि सरकार, तकनीकी विशेषज्ञ और चालक मिलकर इस योजना को सही दिशा में ले जाएँ, तो यह टैक्सी बाजार में निजी कंपनियों की एकाधिकार नीति को तोड़ने का महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।
हालाँकि, इसे सफल बनाने के लिए तकनीकी विकास, प्रशासनिक संरचना और सरकारी सहयोग की आवश्यकता होगी। यदि सही रणनीति अपनाई जाए, तो यह मॉडल भारत में परिवहन प्रणाली को अधिक समावेशी और स्थायी बना सकता है।
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