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IndiaAgriculture: कृषि क्षेत्र में भारत की औसत वार्षिक वृद्धि 4% से अधिक

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज और बिल गेट्स के बीच बैठक में भारत के कृषि और ग्रामीण विकास को लेकर कई अहम मुद्दों पर चर्चा

भारत का कृषि क्षेत्र (IndiaAgriculture) उसकी अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, जो न केवल देश की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करता है बल्कि लाखों किसानों की आजीविका का मुख्य स्रोत भी है। सोमवार को नई दिल्ली में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान और गेट्स फाउंडेशन के संस्थापक बिल गेट्स के बीच हुई बैठक में भारत के कृषि (IndiaAgriculture) और ग्रामीण विकास को लेकर कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। इस बैठक में कृषि अनुसंधान, तकनीकी नवाचार, महिला सशक्तिकरण, जलवायु-अनुकूलित कृषि पद्धतियाँ और समावेशी विकास पर जोर दिया गया।

IndiaAgriculture: औसत वार्षिक वृद्धि और वैश्विक योगदान

भारत के कृषि क्षेत्र (IndiaAgriculture) ने पिछले दशक में 4% से अधिक की औसत वार्षिक वृद्धि दर्ज की है। यह उपलब्धि तब और महत्वपूर्ण हो जाती है जब यह देखा जाए कि भारत (IndiaAgriculture) के पास विश्व के कुल कृषि योग्य भूमि का केवल 4% और स्वच्छ जल संसाधनों का भी 4% से कम हिस्सा है। इसके बावजूद, भारत 18% वैश्विक आबादी और 15% पशुधन को खाद्य सुरक्षा प्रदान करता है।

 IndiaAgriculture की प्रमुख उपलब्धियाँ

  • बाजरा, मसाले, दूध और दालों का दुनिया में सबसे बड़ा उत्पादक
  • चावल, गेहूं, फल-सब्जियों का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक
  • सतत कृषि पद्धतियों को बढ़ावा, जैसे प्राकृतिक खेती और जैविक कृषि
  • 11 करोड़ से अधिक किसानों को प्रत्यक्ष वित्तीय सहायता

सरकार कृषि बजट में 10-11% योगदान देती है, जो कि ₹5 लाख करोड़ से अधिक है। यह दर्शाता है कि कृषि क्षेत्र (IndiaAgriculture) भारत की नीति निर्माण की प्राथमिकता में सबसे ऊपर है।

IndiaAgriculture
नई दिल्ली में बिल गेट्स के साथ चर्चा करते शिवराजसिंह चौहान। फोटो: सौजन्य PIB

शिवराज और बिल गेट्स की बैठक: चर्चा के प्रमुख बिंदु

नई दिल्ली में कृषि भवन में हुई इस बैठक में कृषि और ग्रामीण विकास के अनेक महत्वपूर्ण पहलुओं पर चर्चा की गई। शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत डिजिटल कृषि, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), जैव प्रौद्योगिकी (Biotechnology) और जलवायु-अनुकूलित कृषि पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।

तकनीकी नवाचार और डिजिटल कृषि

  1. एग्रीस्टैक (AgriStack):
    • डिजिटल कृषि अवसंरचना का निर्माण
    • किसानों को तकनीकी सहायता और वित्तीय सेवाओं की उपलब्धता
  2. पीएम फसल बीमा योजना:
    • विश्व की सबसे बड़ी बहु-जोखिम फसल बीमा योजना
    • डिजिटल फसल कटाई डेटा, सैटेलाइट इमेजरी और ऑटोमेटेड वेदर डेटा का उपयोग
    • किसानों को त्वरित ऑनलाइन क्लेम सेटलमेंट सुविधा
  3. महिला सशक्तिकरण में कृषि की भूमिका:
    • लखपति दीदी’ और ‘ड्रोन दीदी’ जैसी योजनाओं के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना
    • सखी मंडलों और महिला स्वयं सहायता समूहों को आर्थिक सहायता

बैठक के दौरान बिल गेट्स ने कहा कि भारत में हो रहा कृषि अनुसंधान श्रेष्ठ है और इससे बाकी दुनिया को भी लाभ हो सकता है। गेट्स फाउंडेशन और आईसीएआर (भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद) के बीच तकनीकी सहयोग को लेकर कई संभावनाओं पर चर्चा हुई।

भारत की खाद्य सुरक्षा और भविष्य की योजनाएँ

भारत जलवायु-प्रतिरोधी और बायोफोर्टिफाइड फसलों के विकास पर विशेष ध्यान दे रहा है।

  • आईसीएआर ने 2900 से अधिक फसल किस्मों का विकास किया, जिनमें से
    • 85% जलवायु-प्रतिरोधी
    • 179 बायोफोर्टिफाइड हैं

गेट्स फाउंडेशन ने भारत के कृषि और ग्रामीण विकास मंत्रालय के साथ मिलकर समावेशी आजीविका कार्यक्रमों को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभाई है। इससे भारत के छोटे और सीमांत किसानों को आर्थिक मजबूती मिली है।

शिवराज का वैश्विक सहयोग पर जोर

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गेट्स फाउंडेशन के सहयोग के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि भारत वैश्विक साझेदारों के साथ मिलकर विश्व के पिछड़े और गरीब क्षेत्रों की मदद करने के लिए प्रतिबद्ध है।

भारत के वैश्विक योगदान की संभावनाएँ

  • डिजिटल कृषि और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का उपयोग
  • बायोटेक्नोलॉजी और क्लाइमेट-स्मार्ट एग्रीकल्चर
  • कृषि उत्पादकता बढ़ाने के लिए वैश्विक अनुसंधान में सहयोग

भारत G-20 और अन्य अंतरराष्ट्रीय मंचों पर तकनीकी विशेषज्ञता साझा कर रहा है, जिससे दुनिया के कई देशों को सतत कृषि पद्धतियों का लाभ मिल रहा है।

भारत का कृषि क्षेत्र तेजी से डिजिटल और तकनीकी रूप से समृद्ध हो रहा हैशिवराज सिंह चौहान और बिल गेट्स की बैठक से स्पष्ट होता है कि भारत, गेट्स फाउंडेशन और अन्य वैश्विक साझेदारों के साथ मिलकर कृषि और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में बड़े बदलाव लाने के लिए प्रतिबद्ध है। आने वाले वर्षों में क्लाइमेट-रेसिलिएंट क्रॉप्स, डिजिटल फार्मिंग और समावेशी विकास के माध्यम से भारत न केवल अपनी खाद्य सुरक्षा को सशक्त करेगा, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी योगदान देगा।

यह भी पढ़ें:

https://pib.gov.in/PressReleseDetail.aspx?PRID=2111847&reg=3&lang=2

https://www.thedailynewspost.com/india-america-10-matters/

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