
भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पहचान का सबसे बड़ा उत्सव, प्रयागराज महाकुंभ (Mahakumbh) , एक बार फिर अपनी भव्यता और पवित्रता के साथ विश्व मंच पर भारतीय संस्कृति की अद्वितीयता को प्रदर्शित कर चुका है। हाल ही में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा को संबोधित करते हुए महाकुंभ (Mahakumbh) के सफल आयोजन की सराहना की और इस ऐतिहासिक आयोजन को राष्ट्र की शक्ति और एकता का परिचायक बताया।
प्रधानमंत्री ने महाकुंभ (Mahakumbh) के आयोजन में योगदान देने वाले प्रत्येक व्यक्ति, प्रशासनिक निकायों और सेवा कार्यकर्ताओं को बधाई दी। उन्होंने इसे केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक विरासत, सामाजिक समरसता और सामूहिक प्रयासों का उत्कृष्ट उदाहरण बताया।
Mahakumbh: भागीरथ प्रयास का आधुनिक रूप
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महाकुंभ (Mahakumbh) की तुलना पौराणिक राजा भागीरथ से की, जिन्होंने गंगा को धरती पर लाने के लिए अथक प्रयास किए थे। उन्होंने कहा कि प्रयागराज महाकुंभ (Mahakumbh) भी उसी प्रकार, अनेक लोगों के संयुक्त प्रयासों का परिणाम है। इस आयोजन ने पूरी दुनिया को भारत की संस्कृति, भक्ति, और आध्यात्मिक चेतना से परिचित कराया।
भारत की शक्ति और एकता का अद्वितीय प्रदर्शन
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण में इस बात पर जोर दिया कि प्रयागराज महाकुंभ (Mahakumbh) ने यह साबित कर दिया कि भारत विविधताओं से भरा होने के बावजूद एकता के सूत्र में बंधा है।
- इस महाकुंभ (Mahakumbh) में देश के हर कोने से आए श्रद्धालुओं ने बिना किसी भेदभाव के स्नान किया, पूजा-अर्चना की और गंगा की महिमा का गुणगान किया।
- उन्होंने कहा कि जब देश के विभिन्न हिस्सों के लोग संगम पर मिलकर “हर-हर गंगे” का उद्घोष करते हैं, तो यह “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” की भावना को और सशक्त बनाता है।
- प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि महाकुंभ (Mahakumbh) केवल धर्म का आयोजन नहीं, बल्कि राष्ट्रीय चेतना की जागृति का अवसर भी है, जो राष्ट्र को अपने संकल्पों की ओर प्रेरित करता है।
राष्ट्र के विकास और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में महाकुंभ (Mahakumbh) और अयोध्या राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा की तुलना की और कहा कि ये दोनों आयोजन भारत के सांस्कृतिक पुनर्जागरण के प्रतीक हैं।
- उन्होंने कहा कि जैसे इतिहास में कुछ क्षण होते हैं जो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनते हैं, वैसे ही महाकुंभ (Mahakumbh) और राम मंदिर का निर्माण भारत के नए युग की शुरुआत का संकेत दे रहे हैं।
- उन्होंने युवाओं की भागीदारी पर भी जोर दिया और कहा कि आज के युवा अपनी परंपराओं और आध्यात्मिक धरोहर को गर्व से अपना रहे हैं, जो भारत की सांस्कृतिक विरासत की निरंतरता का प्रमाण है।
नदी संरक्षण और महाकुंभ से प्रेरणा
प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में नदियों के संरक्षण पर भी जोर दिया और कहा कि महाकुंभ (Mahakumbh) से प्रेरित होकर भारत में नदियों के सम्मान और उनकी स्वच्छता के लिए नई पहल शुरू की जानी चाहिए।
- उन्होंने गंगा स्वच्छता अभियान को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए समाज के हर वर्ग को आगे आने का आह्वान किया।
- साथ ही, उन्होंने मॉरीशस यात्रा का जिक्र करते हुए बताया कि वे वहां त्रिवेणी संगम का पवित्र जल ले गए थे, जिसे गंगा तालाब में अर्पित किया गया। यह भारत की सांस्कृतिक विरासत और इसकी वैश्विक पहचान को और अधिक सशक्त करने का उदाहरण बना।
महाकुंभ: एकता और समर्पण का संगम
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि प्रयागराज महाकुंभ (Mahakumbh) ने समाज को ‘मैं’ की बजाय ‘हम’ की भावना से प्रेरित किया। इस आयोजन ने यह सिद्ध कर दिया कि जब पूरा देश एक साथ आता है, तो वह किसी भी चुनौती को पार कर सकता है।
- महाकुंभ में शामिल लोगों ने सामाजिक और आर्थिक स्तर की सभी दीवारों को तोड़ दिया, जहां सभी ने समान आस्था और श्रद्धा के साथ गंगा स्नान किया।
- इस आयोजन ने दुनिया को यह संदेश दिया कि भारत की असली ताकत उसकी संस्कृति, आध्यात्मिकता और सामाजिक एकता में निहित है।
महाकुंभ से मिली प्रेरणाएं और भविष्य की दिशा
प्रधानमंत्री मोदी ने महाकुंभ (Mahakumbh) की सकारात्मक ऊर्जा और इसके गहरे प्रभावों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह आयोजन न केवल आध्यात्मिक बल्कि आर्थिक और पर्यावरणीय दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है।
- पर्यटन और अर्थव्यवस्था: इस भव्य आयोजन ने भारत की पर्यटन अर्थव्यवस्था को बढ़ावा दिया और प्रयागराज को वैश्विक नक्शे पर एक प्रमुख आध्यात्मिक स्थल के रूप में स्थापित किया।
- साफ-सफाई और पर्यावरण संरक्षण: इस बार का महाकुंभ स्वच्छता और सतत विकास के लिए एक मिसाल बना, जिसमें आधुनिक तकनीकों और परंपरागत ज्ञान का समन्वय किया गया।
महाकुंभ से राष्ट्रीय संकल्प की ओर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में अपने संबोधन के अंत में यह विश्वास व्यक्त किया कि प्रयागराज महाकुंभ केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक और सामाजिक ताकत का जीवंत प्रमाण है।
- उन्होंने इस आयोजन में योगदान देने वाले प्रत्येक व्यक्ति को धन्यवाद दिया और कहा कि इस महान परंपरा से प्राप्त प्रेरणाएं राष्ट्र को नए संकल्पों की ओर ले जाएंगी।
- महाकुंभ के माध्यम से राष्ट्रीय एकता, सांस्कृतिक धरोहर और आध्यात्मिक पुनर्जागरण के नए द्वार खुले हैं, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक बनेंगे।
इस ऐतिहासिक आयोजन ने एक बार फिर साबित किया कि भारत की विविधता ही उसकी सबसे बड़ी ताकत है और जब देश एकजुट होता है, तो वह नई ऊंचाइयों को छूने के लिए तैयार रहता है।
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