
केंद्र सरकार किसानों की भलाई के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीद (Procurement) सुनिश्चित कर रही है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने दालों में आत्मनिर्भरता के लिए 2028-29 तक तुअर, उड़द और मसूर की 100% खरीद की प्रतिबद्धता जताई है।
नैफेड और एनसीसीएफ के माध्यम से आंध्र प्रदेश, गुजरात, कर्नाटक, महाराष्ट्र और तेलंगाना में उपज को किसानों से लिया जाना जारी है। पीएम-आशा योजना को 2025-26 तक बढ़ाया गया है। सरकार सभी राज्य सरकारों से अपील कर रही है कि किसानों से MSP से कम पर कोई उपज नहीं ली जाए, जिससे किसानों को अधिक लाभ मिल सके।
भारत सरकार किसानों के हितों की रक्षा के लिए लगातार कदम उठा रही है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने स्पष्ट किया है कि किसानों से उनकी उपज को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर लिया जा रहा है, ताकि उन्हें उनके फसलों का उचित मूल्य मिल सके। उन्होंने सभी राज्य सरकारों से आग्रह किया है कि वे सुनिश्चित करें कि कोई भी उपज को MSP से कम कीमत पर नहीं लिया जाए।
प्रमुख राज्यों में जारी है खरीद (Procurement) प्रक्रिया
केंद्र सरकार की नोडल एजेंसियों नैफेड (NAFED) और एनसीसीएफ (NCCF) के माध्यम से देश के प्रमुख कृषि उत्पादक राज्यों में किसानों की उपज को लिया जा रहा है। आंध्र प्रदेश, गुजरात, कर्नाटक, महाराष्ट्र और तेलंगाना में MSP पर दालों का क्रय तेजी से हो रहा है। 25 मार्च 2025 तक, 2.46 लाख मीट्रिक टन तुअर (अरहर) की ली जा चुकी है, जिससे 1,71,569 किसान लाभान्वित हुए हैं।
दलहन में आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि भारत को दालों में आत्मनिर्भर बनाना सरकार का प्रमुख लक्ष्य है। इसी उद्देश्य से वर्ष 2024-25 के लिए “मूल्य समर्थन योजना (PSS)” के तहत तुअर, उड़द और मसूर की 100% खरीद को मंजूरी दी गई है।
इसके अलावा, बजट 2025 में यह घोषणा की गई है कि भारत में दलहन उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए 2028-29 तक तुअर, उड़द और मसूर की 100% खरीद की जाएगी। खरीफ 2024-25 सीजन के दौरान मूल्य समर्थन योजना के अंतर्गत आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात, हरियाणा, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, तेलंगाना और उत्तर प्रदेश में तुअर (अरहर) लेने को मंजूरी दी गई है।
कर्नाटक में अवधि बढ़ाई गई
सरकार किसानों को अधिक अवसर देने के लिए लचीला रुख अपना रही है। इसी दिशा में, कर्नाटक में खरीद की अवधि 90 दिनों से बढ़ाकर 1 मई तक कर दी गई है, ताकि अधिक किसान इसका लाभ उठा सकें।
चना, सरसों और मसूर के लिए मंजूरी
रबी विपणन सीजन (RMS) 2025 के दौरान चना, सरसों और मसूर की खरीदी को भी मंजूरी दी गई है। सरकार ने PM-AASHA योजना को 2025-26 तक बढ़ाने का निर्णय लिया है, जिससे दालों और तिलहनों को MSP पर लेना सुनिश्चित किया जा सके।
स्वीकृत खरीद मात्रा इस प्रकार है:
- चना: 27.99 लाख मीट्रिक टन
- सरसों: 28.28 लाख मीट्रिक टन
- मसूर: 9.40 लाख मीट्रिक टन
इन फसलों को मुख्य रूप से राजस्थान, मध्य प्रदेश और गुजरात में लिया जाएगा
तमिलनाडु में मंजूरी
इसके अलावा, तमिलनाडु में खोपरा (मिलिंग और बॉल) के क्रय को भी स्वीकृति दी गई है। यह निर्णय किसानों की आय बढ़ाने और उन्हें अधिक आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने के लिए लिया गया है।
पंजीकरण प्रक्रिया को किया गया आसान
सरकार चाहती है कि अधिक किसान इन योजनाओं का लाभ उठा सकें। इसी वजह से पंजीकरण प्रक्रिया को सरल बनाया गया है और नैफेड तथा एनसीसीएफ पोर्टलों का उपयोग सुनिश्चित किया गया है, जिससे किसानों को किसी प्रकार की कठिनाई न हो।
सरकार की अपील:
शिवराज सिंह चौहान ने दोहराया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में केंद्र सरकार पूरी तरह से किसान हितैषी नीतियों पर काम कर रही है। सरकार का लक्ष्य किसानों से MSP से नीचे कोई भी उपज को नहीं लिया जाए, ताकि किसानों को उनका हक मिल सके। सरकार द्वारा उठाए गए इन ठोस कदमों से यह स्पष्ट है कि किसानों की आर्थिक स्थिति सुधारने और दालों में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने की दिशा में तेजी से कार्य किया जा रहा है।
यह भी पढ़ें:
https://pib.gov.in/PressReleseDetail.aspx?PRID=2115595®=3&lang=2