
Spirulina: खराब जीवनशैली और दूषित पर्यावरण के बीच सेहतमंद कैसे रहा जाए, इसे लेकर स्वास्थ्य के क्षेत्र में लगातार नवाचार हो रहे है। मुख्य रूप से हृदय रोग, मधुमेह, ब्लड प्रेशर के बढ़ते रोगियों को देखते हुए खानपान के परंपरागत तरीकों के अलावा प्राकृतिक संसाधनों और उनके इस्तेमाल पर जोर दिया जा रहा है।
ऐसा ही एक खाद्य पदार्थ है स्पाइरुलिना, शुगर और हार्ट Cholesterol के पैशेंट के लिए यह बेहद कारगर भोज्य पदार्थ है। यह विश्व के सबसे लोकप्रिय पूरक भोजन में शामिल है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इस समुद्री काई को सुपरफूड के रूप में रखा है। इसे कुपोषण दूर करने का अच्छा माध्यम माना जा रहा है।
क्या है Spirulina
दरअसल, स्पाइरुलिना समुद्री शैवाल algae है। यह नीले-हरे रंग का शैवाल है। आजकल इसकी समुद्र तटीय इलाकों की जमीन में खेती होने लगी है।
अब यह समुद्र के बजाए खेतों में भी उगाया जाने लगा है। इसे सादे पानी या खारे पानी दोनों में उगाया जा सकता है। इंसान की सेहत को कई स्वास्थ्य लाभ प्रदान करता है।
इससे व्यक्ति की इम्युनिटी immunity यानी प्रतिरक्षा तंत्र मजबूत होता है। यह सूजन को कम करता है और कोलेस्ट्रॉल Cholesterol और रक्तचाप ब्लड प्रेशर को कम करता है।
यह प्रोटीन और एंटीऑक्सीडेंट Antioxidant का भी अच्छा स्रोत है। इसे सुपरफूड Spirulina super food भी माना जाता है। तमिलनाडु और पुडुचेरी में इसकी खेती किसानों की कमाई का अच्छा स्रोत बन गया है।
कैंसर विरोधी गुण भी
कुछ अध्ययनों में कहा गया है कि स्पाइरुलिना में कैंसर रोधी गुण anti-cancer भी हैं। हालांकि, इस बारे में और अध्ययन की जरूरत है, लेकिन पशुओं पर किए गए शोध में पता चला है कि यह कैंसर को रोकता है और विभिन्न प्रकार के कैंसर की गांठों को बढ़ने नहीं देता है।
सेहत का खजाना है स्पाइरुलिना
- स्पाइरुलिना में प्रोटीन, विटामिन (जैसे बी12 और बीटा-कैरोटीन), खनिज (जैसे आयरन और मैग्नीशियम) और एंटीऑक्सीडेंट सहित आवश्यक पोषक तत्व भरपूर मात्रा में होते हैं।
इसे प्रोटीन का अच्छा स्रोत माना जाता है। इसमें वो सभी नौ आवश्यक अमीनो एसिड होते हैं, जिनकी शरीर को आवश्यकता होती है, लेकिन शरीर इन्हें स्वयं उत्पन्न नहीं कर सकता। - इसमें फाइकोसायनिन सहित कई एंटीऑक्सीडेंट प्रचुर मात्रा में होते हैं, जो कोशिकाओं को मुक्त कणों से होने वाली क्षति से बचाते हैं।
कोलेस्ट्रॉल को कम करता है स्पाइरुलिना
यह एंटीबॉडी और अन्य प्रतिरक्षा कोशिकाओं के उत्पादन को बढ़ाकर इंसान की प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने में मदद करता है। इसके एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण शरीर में सूजन को कम करने में मदद कर सकते हैं।
यह कोलेस्ट्रॉल खासकर लो डैनसिटी लिपोप्रोटीन (LDL) या बेड कोलेस्ट्रॉल के साथ ही ट्राइग्लिसराइड्स triglycerides को भी कम करता है। इतना ही नहीं यह अच्छे कोलेस्ट्रॉल यानी हाई डेनसिटी लिपोप्रोटीन (HDL) को बढ़ाता है। ये सभी तत्व हृदय रोग से जुड़ी जोखिमों को कम करते हैं।
नाइट्रिक ऑक्साइड बढ़ाता है
स्पाइरुलिना Spirulina के सेवन से शरीर में नाइट्रिक ऑक्साइड का स्तर बढ़ता है, इससे ब्लड प्रेशर को कम करने में मदद मिलती है, दिल मजबूत रहता है।
रक्त शर्करा blood sugar नियंत्रित होती है
कुछ शोध से पता चलता है कि स्पिरुलिना के सेवन से टाइप 2 डायबिटीज type 2 diabetes वाले लोगों में रक्त शर्करा blood sugar के स्तर में सुधार हो सकता है।
वजन घटाने में मददगार
स्पिरुलिना शरीर को अंदर से स्ट्रांग करता है और शरीर में वसा fats को कम करके वजन घटाने में मदद करता है।
खून की कमी दूर करता है
इससे एनीमिया यानी शरीर में खून की कमी करने में मदद मिलती है। यह शरीर में खून की कमी एनीमिया से लड़ने में उपयोगी हो सकता है।
कैसे करें Spirulina का सेवन
स्पिरुलिना Spirulina आजकल पावडर के रूप में बाजार में उपलब्ध है। इसे करीब 10 ग्राम नींबू पानी, छाछ, सादे पानी में मिलाकर सुबह शाम लिया जा सकता है। लंबे समय तक भी इसका सेवन करने का कोई दुष्प्रभाव नहीं है।
हालांकि, अधिक मात्रा में सेवन या बहुत ज्यादा समय तक सेवन से इसके गंभीर दुष्प्रभाव भी हो सकते हैं। ज्यादा मात्रा में सेवन से सिरदर्द, डायरिया, पेट में जलन और गैस जैसी भी समस्या भी हो सकती है।
त्वचा पर निशान, सूजन और सांस में तकलीफ भी हो सकती है। इसलिए इसका अल्पमात्रा में और चिकित्सकीय या आयुर्वेद के परामर्श से ही सेवन करना उचित होता है।
एक चम्मच या 7 ग्राम स्पाइरुलिना पावडर में पोषक तत्व
पोषक तत्व | मात्रा (7 ग्राम स्पाइरुलिना पाउडर में) |
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प्रोटीन | 4 ग्राम |
आयरन | 11% |
थायमिन | 14% |
राइबोफ्लेविन | 20% |
नियासिन | 6% |
तांबा | 47% |
अन्य तत्व | मैग्नीशियम, पोटैशियम, मैंगनीज, ओमेगा-6 और ओमेगा-3 फैटी एसिड्स (अल्प मात्रा में) |
डिस्क्लेमर : इस कंटेंट में दी गई जानकारी मात्र सूचनात्मक है। कोई भी औषधीय प्रयोग से पहले अपने चिकित्सक की सलाह अवश्य लें।
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